हिंदी समाचार और लेख

चौथे दलित साहित्य महोत्सव की घोषणा

दलित साहित्य के माध्यम से विश्व शांति के लिए एक मंच

नई दिल्ली :दिल्ली विश्वविद्यालय (साउथ कैंपस) के आर्यभट्ट कॉलेज में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौथे दलित साहित्य महोत्सव (DLF) की आधिकारिक घोषणा की गई। इस वर्ष के महोत्सव की थीम “दलित साहित्य के माध्यम से विश्व शांति संभव है”रखी गई है। यह महोत्सव 28 फरवरी और 1 मार्च 2025 को आर्यभट्ट कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (साउथ कैंपस) में आयोजित होगा। इसका आयोजन अंबेडकरवादी लेखक संघ (ALS)द्वारा, आर्यभट्ट कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (साउथ कैंपस), दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (DASAM)तथा अन्य संगठनों के सहयोग से किया जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में, प्रोफेसर सूरज बडत्याऔर  संजीव कुमार डांडा, दलित साहित्य महोत्सव के संस्थापक, ने कहा, “दुनिया इस समय विभिन्न संघर्षों का सामना कर रही है, ऐसे में इस वर्ष के DLF की थीम ‘दलित साहित्य के माध्यम से विश्व शांति संभव है’ अत्यंत प्रासंगिक है। हमारा मानना है कि साहित्यिक विमर्श संघर्षों को हल करने और शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमारा लक्ष्य साहित्य के माध्यम से शांति को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर शांति को मजबूत करना है। आगामी DLF आयोजनों में, हम शांति को बढ़ावा देने और रूढ़ियों तथा हानिकारक विचारधाराओं को तोड़ने का कार्य जारी रखेंगे।”

DLF का उद्देश्य दलित साहित्य के गहरे मानवीय, सामाजिक और वैश्विक महत्व को रेखांकित करना है। इस वर्ष की थीम साहित्य की परिवर्तनकारी शक्ति पर बल देती है, जो केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं बल्कि मानव चेतना को जागृत करने और वैश्विक स्तर पर शांति को बढ़ावा देने का माध्यम है। यह महोत्सव यह भी सिद्ध करने का प्रयास करेगा कि दलित साहित्य न्याय, समानता, बंधुत्व और अहिंसा को बढ़ावा देने का एक उपकरण है, जो सामाजिक अन्याय, जातिगत भेदभाव और मानवाधिकारों के मुद्दों को भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबोधित करता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, प्रमुख वक्ताओं ने इस महोत्सव के महत्व और इसकी वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह महोत्सव हाशिए पर मौजूद समुदायों, जैसे कि दलित, आदिवासी, महिलाएं, LGBTQIA+ और अन्य अल्पसंख्यकों की आवाज को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वर्ष, यह आयोजन पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, सिनेमा, इतिहास, कविता और शिक्षा सहित विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक विषयोंपर दलित साहित्य के दृष्टिकोण से विमर्श करेगा।

यह महोत्सव शांति को बढ़ावा देने का एक मंच प्रदान करता है, जहां दलित साहित्य हर प्रकार की हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए न्याय, सौहार्द और समानता के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करता है

“दलित साहित्य पीड़ितों की आवाज को सामने लाता है और न्याय, समता और समानता पर आधारित शांति की मांग करता है। यह समाज में परिवर्तन लाने का एक सशक्त साधन है।”

प्रोफेसर बलराज, आर्यभट्ट कॉलेज
महोत्सव के संयोजक

“यह महोत्सव डॉ. बी. आर. अंबेडकर के उस दृष्टिकोण से मेल खाता है, जो समुदाय को सशक्त बनाने और एक अधिक न्यायसंगत एवं समान समाज बनाने की दिशा में काम करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से, हम दलित साहित्य पर विमर्श को नया रूप देना चाहते हैं और लेखनी को समाज की कहानियां कहने का सशक्त उपकरण बनाना चाहते हैं। यह मंच उन लोगों के लिए है जो अपने जीवन के संघर्ष और पीड़ा को साझा करना चाहते हैं, जो वास्तव में प्रतिरोध और शक्ति में तब्दील हो जाते हैं।”

प्रोफेसर सीमा माथुर, कलिंदी कॉलेज

“यह महोत्सव उन संघर्षों को उजागर करने का मंच प्रदान करता है, जिनका सामना हाशिए पर मौजूद समुदायों को करना पड़ता है। इसके माध्यम से, हम उन लोगों को आवाज देने और उनकी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जिनकी अनदेखी की जाती रही है। हमारा सामूहिक लक्ष्य शांति, न्याय, समता, उत्थान और समानता की दिशा में कार्य करना है।”

महोत्सव के सह-संयोजक अशोक कुमार, प्रोफेसर, मोतीलाल कॉलेज

“यह महोत्सव हाशिए पर मौजूद और वंचित समुदायों के लिए स्थानों को पुनः प्राप्त करने का एक मंच है। यह दलित साहित्य, इतिहास, संस्कृति, संगीत और सिनेमा को उजागर करता है और महिलाओं, आदिवासियों, LGBTQIA+ समुदाय तथा अन्य अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर समावेशी चर्चाओं के लिए एक महत्वपूर्ण वातावरण तैयार करता है। यह आवश्यक है कि हम उस धारणा को तोड़ें कि दलित साहित्य केवल जाति आधारित मुद्दों तक सीमित है। इस साहित्य की परिधि को और अधिक व्यापक बनाने की जरूरत है।”

मोहसीना अख्तर, महोत्सव टीम की सदस्य

इस वर्ष का महोत्सव विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले साहित्यकारों, विद्वानों, सांस्कृतिक नेताओं, गायक-कलाकारों, नाटककारों और अन्य कलाकारोंकी एक विशिष्ट सभा का आयोजन करेगा। कार्यक्रम के तहत विषयगत सत्र, शोध पत्र प्रस्तुतियाँ, पैनल चर्चाएँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, पुस्तक प्रदर्शनियाँ और कला प्रदर्शनियाँआयोजित की जाएंगी। ये गतिविधियाँ बौद्धिक और कलात्मक संवाद के एक समग्र मंचका निर्माण करेंगी, जो भारत में दलित, महिला, आदिवासी समुदाय और LGBTQIA+ व्यक्तियों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होगा।

महोत्सव के अंतर्गत पर्यावरणीय मुद्दों के साथ दलित साहित्य के अंतर्संबंध, कला और साहित्य के सामाजिक परिवर्तन में योगदानपर चर्चा की जाएगी। यह महोत्सव दलित साहित्य के वैश्विक संवाद को भी समृद्ध करेगा, यह दर्शाते हुए कि यह समाज में कितना प्रासंगिक है।

पिछले तीन वर्षों में, इस महोत्सव ने साहित्यिक संवाद के लिए नए रास्ते खोले हैं और एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यह न केवल प्रतिनिधित्व और पुनः प्राप्ति का स्थान प्रदान करता है बल्कि साहित्यिक और सामाजिक विमर्श में एक नई दृष्टि जोड़ता है।

चौथे दलित साहित्य महोत्सव का विवरण:

📅 तारीख:28 फरवरी और 1 मार्च 2025
📍 स्थान:आर्यभट्ट कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (साउथ कैंपस)
🎭 थीम: “दलित साहित्य के माध्यम से विश्व शांति संभव है”

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: 📞 8491052270, 9599295017, 7503655071

आयोजक: अंबेडकरवादी लेखक संघ (ALS); आर्यभट्ट कॉलेज – दिल्ली विश्वविद्यालय (साउथ कैंपस); दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (DASAM); रिदम पत्रिका; मगध फाउंडेशन; PMARC

टीम इये मराठीचिये नगरी

Recent Posts

विशेष आर्थिक लेखः राज्यांच्या वित्तीय कसरतीचे वास्तव गंभीरच Financial Reality of the states

देशातील बहुतेक सर्व राज्य सरकारांची आर्थिक स्थिती बऱ्याच प्रमाणात चिंताजनक आहे. प्रत्येक राज्याची स्थिती पाहिल्यास…

4 hours ago

हुकूमाचा एक्का नि भाऊचा धक्का…ऑपरेशन टायगरने उबाठाची झोप उडवली Ekanath Shinde Operation Tiger

सहा खासदारांच्या पक्षांतराचा धक्का अजूनही सावरता न आलेल्या उद्धव ठाकरे यांच्या शिवसेनेला आता विधान परिषदेचे…

18 hours ago

प्रेमाने केलेले प्रत्येक कर्तव्य हीच खरी पूजा True Worship

मनुष्याला मोक्ष मिळण्यासाठी जन्म, जात, कुल, विद्वत्ता किंवा बाह्य कर्मकांड यांपेक्षा अंतःकरणातील निखळ प्रेम अधिक…

19 hours ago

तुळजापूर येथील जागर साहित्य पुरस्कारासाठी साहित्यकृती पाठविण्याचे आवाहन Call for Jagar Literary Award In Tuljapur

तुळजापूर : मराठवाडा साहित्य परिषद, शाखा तुळजापूर यांच्या वतीने 'जागर साहित्य पुरस्कार' जाहीर करण्यात आला…

2 days ago

तेंगबोचेची खडतर अन् रम्य वाट.. The difficult and beautiful path to Tengboche

स्वप्नापलिकडची एव्हरेस्ट वारी भाग - ६ एव्हरेस्ट बेस कॅम्पच्या प्रवासातील तेंगबोचेकडे जाणारा टप्पा म्हणजे हिमालयाच्या…

2 days ago

ओअँसिसचा हिरवा श्वास अन् सहाराच्या वादळाचा काळा कहर The green breath of the oasis

सहारा म्हटलं की डोळ्यांसमोर उभं राहतं ते अंतहीन वाळूचं साम्राज्य. पण याच वाळवंटाच्या मध्यभागी हिरवाईने…

3 days ago